जनपद में हॉस्पिटल व अल्ट्रासाउंड का एक बड़ा रैकेट हो गया है ना तो कोई रेडियोलॉजिस्ट ना तो कोई मानक है



 सामाजिक आईटीआई कार्यकर्ता कमलेश पाण्डेय स्वास्थ्य विभाग में कितनी बार सूचना दिए हैं

1 जनपद सोनभद्र में राबर्ट्सगंज धरले से स्टार डायग्नोस्टिक* संचालित किया जा रहा है ना तो उनके पास कोई डॉक्टर है ना कोई डिग्री धारक है ना तो रेडियोलॉजिस्ट है और  छठ के ऊपर उनका डायग्नोस्टिक खुला है मरीज को ऊपर उतरने चढ़ने में काफी परेशानी हो रहा है

स्वास्थ्य विभाग टीम देखकर भी आंख बन्द है 


किसी हॉस्पिटल में गरीब मरीजो को पकड़ो और इलाज करो मर जाए तो सौदा करो नही तो किसी को कानो कान पता ही न चले लेकिन तू डाल डाल हम पात पात की कहावत तो सुना ही होगा हॉस्पिटल, अल्ट्रासाउंड पैथोलॉजी का यहां रैकेट रॉबर्ट्सगंज मैं धरल्ले से फल फूल रहा है कुछ चुनींदे अल्ट्रासाउंड है जो दादा गिरी पर चलाते हैं और अपनी पहुच स्वास्थ्य विभाग से लेकर ऊपर तक बताते हैं जब फस गए बेटा न तो कोई पहुच काम नही करेगा । दूर दराज से आए हुए मरीज चाहे वह अपने लड़के का अल्ट्रासाउंड कराने आया हो चाहे अपनी पत्नी का कराने आया हो चाहे अपनी लड़की का कराने आया हो दलाल इस कदर परिजन को इतना मोटिवेट कर देते हैं की मरीज उनके झांसे में आ जाते हैं और उनको पैसा चुकाकर ही जाना पड़ता है नहीं तो बंधक बना लिया जाता है इतना ही नहीं कुछ तो हॉस्पिटल कर्ज दिलाने में भी सक्षम रहते हैं यह सिलसिला बहुत दिनों से चल रहा है चाहे वह जिला अस्पताल के अंदर दलाल घूम रहे हैं चाहे वह अस्पताल के बाहर वही हाल एमसीएच का भी है वहां भी दलाल अक्सर आपको चाय की दुकान ,रास्ते में फोर व्हीलर, टू व्हीलर खड़ा करके इंतजार करते रहते हैं जैसे ही अस्पताल से गार्ड,डाक्टर की घंटी बजती है वैसे ही दलाल रास्ते में परिजनों से सेट करने में कामयाब हो जाते हैं उन्हें वाराणसी पहुंचने की जरूरत ही नहीं पड़ता। इन झोलाछाप डॉक्टरों की जुगलबंदी से न जाने कितने परिवार को दुःखों का सामना करना पड़ा और आगे न जाने कितने परिवार के ऊपर दुःखों का कहर गिरने वाला है।

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