निकाय चुनाव नजदीक आते ही प्रत्याशियों ने किया वोटरों को लुभाना शुरू



वोटरों की हो रही बल्ले- बल्ले इधर खा लिया अब उधर चल्ले


रिजवान सिद्दिकी


झालू । नगर निकाय  चुनाव नजदीक आते ही चैयरमैन पद व सभासद का चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले प्रत्याशियों ने जनसंपर्क शुरू कर दिया   है। साथ ही  प्रत्याशियों  व उनके समर्थकों ने  अपनी- अपनी गोटियां फिट कर लोक लुभावने वादों के साथ मुगेरी लाल के हसीन सपने जनता को दिखाने शुरू कर दिये हैं । चुनाव आते ही गिरगिट की तरह रंग बदल कर लोगों के सुख-दुख बांटना व खिलाना पिलाना भी शुरू कर दिया है। चुनाव जीतने के बाद उनके द्वारा नगर के विकास के लिए क्या-क्या कार्य किए जाएंगे वह वादे  भी करने शुरू कर दिए है । प्रत्याशियो द्वारा जनता से किए जा रहे वादों को देखते हुए लग रहा है कि इस बार चुनाव जीतकर जो भी प्रत्याशी  नगर पंचायत के अध्यक्ष व सभासद की गद्दी पर बैठेगा विकास में चार चांद लगा देगा और विकास की गंगा बहा देंगे। जैसा हर बार चुनाव के दौरान चुनाव से पहले  नगर पंचायत की जनता को लगता है। यह बात और है कि चुनाव जीतने के बाद  कस्बा झालू का विकास कहां तक दौड़ता  है। फिलहाल इस समय प्रत्याशियों को लेकर चर्चाओं का माहौल गर्म है। किस समय कौन सा नया चेहरा चुनाव मैदान में उतर जाए या किस चेहरे के समर्थक किस और बैठ जाए कहा नहीं जा सकता। जातीय समीकरण को लेकर भी उठापटक जारी है। इस बार जहां कुछ प्रत्याशी खुलकर चुनाव मैदान में उतर चुके हैं तो वहीं दूसरी ओर कुछ प्रमुख पार्टियों से टिकट के दावेदारों की लाइन लंबी है।चुनाव से पहले टिकट के दावेदारों की कतार लंबी होती जा रही है। सभी पार्टियों में टिकट के लिए मंथन शुरू होते ही दावेदारों की धडक़नें बढ़ने लगी हैं।   नगर पंचायत अध्यक्ष पद व सभासद पद के  चुनाव में हाथ आजमाने के लिए टिकट के दावेदारों की सबसे लंबी लाइन भाजपा में लगी है।  इनमें कई दिग्गज नेता भी शामिल हैं। अन्य पार्टियों  से भी टिकट के दावेदार  कम नहीं हैं। अपनों की  खिलाफत करके अन्य कई नेता भी टिकट की लाइन में हैं। अब इन सभी दावेदारों की धडक़नें बढ़नी शुरू हो गई हैं की पार्टी किसको टिकट देगी।  इसके लिए बैठकों का दौर शुरू हो गया है।  इसको लेकर समर्थकों में भी चर्चाओं का माहौल गर्म है। पार्टियों से टिकट मांगने वाले दावेदारों के समर्थक अपने चहेते प्रत्याशी का टिकट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उनके चहेते प्रत्याशी को टिकट मिलते ही वह चुनाव का बिगुल फूंक देगें । तो वहीं दूसरी ओर कुछ  बुद्धिजीवी लोग खामोशी के साथ  चुनाव मैदान में उतरने वाले उम्मीदवारों का तमाशा देख रहे हैं। ताकि वे चुनाव के वक्त निर्णय ले सके कि किस टिकाऊ और मजबूत प्रत्याशी को चुनाव लड़ाया जाए।

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