शामली- शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन




मंगलम साहित्य  मंच दिल्ली के तत्वावधान  में शिक्षक  दिवस  की पूर्व  संध्या पर एक "सरस कवि सम्मेलन " का आन लाइन आयोजन  किया गया जिसकी अध्यक्षता जाने-माने गीतकार  डॉ जयसिंह आर्य  दिल्ली ने की।मुख्य  अतिथि रहे सहारनपुर  के सुप्रसिद्ध गीतकार  विनोद भृंग। संचालन  जानी - मानी कवयित्री  पूनम माटिया व संयोजन सुभाष  राहत बरेलवी का रहा।

   शामली से पधारे गीतकार  सुनील अरोड़ा टम्मी  की माँ वाणी  की की सरस वंदना से कवि सम्मेलन  का शुभारंभ हुआ तत्पश्चात  गुरुग्राम  से पधारे सुप्रसिद्ध  कवि राजपाल सिंह 'राज ' द्वारा "शब्द " शीर्षक  से पढी कविता को सभी ने बडे मनोवियोग से  सुना।



      सुभाष राहत  बरेलवी की इन प॔क्तियों को भरपूर  दाद मिली बानगी:-

गालिब सा मैं कहाऊँ इसकी भी चाह नहीं

मनसे पे बैठ जाऊँ इसकी भी चाह नहीं

औक़ात  में ज़्यादा ही मान मिला है

सबको ही पसंद  आऊँ इसकी भी चाह नहीं

अ अलीगढ़ के कवि अब्दुल रज्जाक 'नाचीज '  की इस रचना को ख़ूब  सराहा गया:-


मैं बच्चा हूँ बच्चों जैसी मेरी तो हर आशा है

मातृ भूमि पर मिट जाने की बस मेरी अभिलाषा है


संचालिका डॉक्टर पूनम माटिया की इन पंक्तियों ने समाज बांध  दिया:-


जुस्तजू है अगर इक सुकूं की तुझे

 बेतहाशा  यूँ  अब दौड़ना छोड़ दे।


मुख्य  आथित्य  काव्य पाठ  में सुप्रसिद्ध गीतकार  विनोद  'भृंग ' के इस गीत  को तालियों की गड़गड़ाहट  के साथ  सुना गया:-


जन्म में मौत तक इक सफ़र ही तो है

तू चलाया क़दम मापना छोड़ दे



रिपोर्ट: रवि संगल मीडिया तेजस्वी न्यूज़ ब्यूरो चीफ 

जिला शामली।

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