20 से अधिक राज्यों के एफपीओ-एफपीसी प्रतिनिधियों की राष्ट्रीय ऑनलाइन परिचर्चा में ग्रामीण बाजार और किसान उत्पादों को लेकर मंथन
हर गांव में खुलेगा तेजस्वी किसान मार्ट, किसान बनेंगे व्यापारी
लखनऊ। गांव में पैदा होने वाले कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और किसानों को उत्पादन के साथ व्यापार से जोड़ने की दिशा में तेजस्वी किसान मार्ट ने अब गांव-गांव तक विस्तार की योजना बनाई है। तेजस्वी संगठन न्यास एवं यूनिवर्सल सोनांचल फार्मर एसोसिएशन के माध्यम से वर्ष 2022 से संचालित तेजस्वी किसान मार्ट का उद्देश्य ग्रामीण उत्पादों को संग्रहण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन से जोड़कर सीधे उपभोक्ता बाजार तक पहुंचाना है।
इसी विषय को लेकर आयोजित राष्ट्रीय ऑनलाइन प्रशिक्षण एवं परिचर्चा में 20 से अधिक राज्यों के एफपीओ, एफपीसी, स्वयं सहायता समूहों, किसानों, ग्रामीण उद्यमियों, विनिर्माण इकाइयों और कृषि क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। परिचर्चा का केंद्रीय संदेश रहा—“उत्पादक से उपभोक्ता तक सीधी पहुंच, किसान बनेंगे व्यापारी और गांव से वैश्विक बाजार।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता एस.के. सिंह ने की, जबकि ई. प्रकाश पाण्डेय मुख्य वक्ता रहे। कार्यक्रम का संचालन हिमांशु चतुर्वेदी ने किया। परिचर्चा में कामिनी सिंह, सतीश हट्टुरे, सुधांशु राय (रुद्र सोलर), जितेंद्र चतुर्वेदी (राजस्थान), चंद्रसेन सिंह, भोला राम महतो, सुमित कावले, आशीष पटेल, ब्रह्मपाल सिंह, अमित ठाकुर, विजेंद्र सिसोदिया और कार्तिक बिस्वास सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए।
इसके अलावा अंकित कुमार सिंह, अंकित उपाध्याय, आशीष प्रसाद पटेल, दिलीप कुमार, दिपाली महतो, डॉ. कमलेंद्र सिंह, हर्षवर्धन मिश्रा, केशव नारायण प्रसाद, कुलदीप कुमार, प्रह्लाद सेऊल, प्रिंस कुमार, राहुल दायमा, राजनिश जांग, रमेश सिंह, संतोष कुमार, शैलेश कुमार सिंह, शिव कुमार यादव, सिद्धांत पटेल, सुकांत कुमार साहू, भोलानाथ महतो और शंकर सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की।
अलग-अलग राज्यों के उत्पादों पर चर्चा
परिचर्चा में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और नागालैंड सहित 20 से अधिक राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों के उत्पादों और बाजार की संभावनाओं की जानकारी दी।
महाराष्ट्र से प्याज और अंगूर, राजस्थान से प्याज, मूंगफली, बाजरा, जीरा, ईसबगोल, गुलाब एवं डेयरी उत्पाद, मध्य प्रदेश से कटहल तथा पश्चिम बंगाल से गोविंदा भोग चावल, काला चावल और तिल की संभावनाएं सामने आईं। उत्तर प्रदेश से आलू, प्याज सहित अन्य कृषि उत्पादों को बाजार से जोड़ने पर चर्चा हुई।
मोरिंगा आधारित उत्पादों के निर्माण तथा कृषि उत्पादों के संरक्षण और मूल्यवर्धन के लिए सौर ऊर्जा आधारित सुखाने की तकनीक को भी ग्रामीण बाजार से जोड़ने पर विचार किया गया।
10 स्टोर स्थापित, अब गांवों तक पहुंच
तेजस्वी किसान मार्ट के अनुसार अब तक 10 स्टोर स्थापित किए जा चुके हैं और चार राज्यों में इसकी स्टोर अथवा गतिविधियों की मौजूदगी है। संस्था के अनुसार लगभग 7,500 किसान उत्पादक संगठनों के नेटवर्क से जुड़ाव भी स्थापित हो चुका है।
अब आगामी चरण में इस नेटवर्क को वास्तविक उत्पादों, किसानों और उपभोक्ताओं से जोड़ते हुए गांव-गांव तक तेजस्वी किसान मार्ट की पहुंच विकसित करने की योजना पर जोर दिया जा रहा है।
एफपीओ होंगे ग्रामीण बाजार की कड़ी
परिचर्चा में कहा गया कि एफपीओ और एफपीसी को केवल उत्पादन और संग्रहण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इसके लिए प्रत्येक क्षेत्र से उपलब्ध उत्पादों की मात्रा, गुणवत्ता, कीमत, पैकेजिंग क्षमता और नियमित आपूर्ति की जानकारी व्यवस्थित रूप से जुटाने पर जोर दिया गया।
इस मॉडल के तहत किसान को केवल उत्पादक के रूप में नहीं, बल्कि अपने उत्पाद के व्यापार और बाजार का भागीदार बनाने की कोशिश की जाएगी।
गांव बनेगा उत्पादन के साथ व्यापार का केंद्र
कार्यक्रम में ग्रामीण युवाओं, महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों को भी ग्रामीण बाजार व्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता बताई गई। उद्देश्य है कि गांव केवल कृषि उत्पादन का केंद्र न रहकर प्रसंस्करण, व्यापार, रोजगार और ग्रामीण उद्यमिता का केंद्र बने।
तेजस्वी किसान मार्ट की आगामी योजना का मूल संदेश है—“हर गांव की अपनी पहचान, हर किसान का अपना बाजार।” संस्था का लक्ष्य है कि गांव में पैदा होने वाला उत्पाद उचित गुणवत्ता, मूल्यवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार व्यवस्था के माध्यम से स्थानीय बाजार से निकलकर राष्ट्रीय और आगे वैश्विक बाजार तक पहुंचे।
“गांव से वैश्विक बाजार • उत्पादक से उपभोक्ता • किसान से व्यापारी” की इसी अवधारणा के साथ तेजस्वी किसान मार्ट के विस्तार की तैयारी की जा रही है।





















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